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NH-43 किनारे पोल्ट्री फार्म से दुर्गंध और प्रदूषण की शिकायत, सरपंच ने कलेक्टर से मांगी जांच और कार्रवाई

CPCB के पर्यावरणीय मानदंडों के पालन पर उठे सवाल; अपशिष्ट निस्तारण, NH-43 से दूरी, आवासीय क्षेत्र और प्रदूषण नियंत्रण अनुमति की जांच की मांग

रिपोर्टर: सुरेंद्र मिनोचा

लोकेशन: —

Aug 21, 20265 min read95 views
NH-43 किनारे पोल्ट्री फार्म से दुर्गंध और प्रदूषण की शिकायत, सरपंच ने कलेक्टर से मांगी जांच और कार्रवाई

मनेंद्रगढ़। नेशनल हाईवे-43 के किनारे ग्राम पंचायत भलौर क्षेत्र में संचालित एक प्राइवेट पोल्ट्री फार्म को लेकर दुर्गंध, अपशिष्ट निस्तारण और संभावित पर्यावरणीय प्रदूषण की शिकायत सामने आई है। ग्राम पंचायत भलौर के सरपंच धर्मपाल सिंह ने इस संबंध में जिला कलेक्टर, एमसीबी को लिखित शिकायत देकर पोल्ट्री फार्म का स्थलीय एवं दस्तावेजी निरीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

सरपंच का आरोप है कि पोल्ट्री फार्म से निकलने वाली दुर्गंध के कारण आसपास के रहवासियों, दुकानदारों और एनएच-43 से गुजरने वाले राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि पोल्ट्री फार्म से निकलने वाले अपशिष्ट के उचित एवं वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने के कारण दुर्गंध के साथ आसपास के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने संबंधी शिकायत का भी उल्लेख पत्र में किया गया है।

CPCB के मानदंडों के पालन को लेकर उठे सवाल

शिकायत में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी Environmental Guidelines for Poultry Farms के प्रावधानों का हवाला देते हुए पोल्ट्री फार्म की स्थापना एवं संचालन से जुड़े पर्यावरणीय मानदंडों की जांच की मांग की गई है।

गाइडलाइन में पोल्ट्री फार्मों के लिए आवासीय क्षेत्रों, जलस्रोतों और अन्य संवेदनशील स्थानों से उचित दूरी तथा दुर्गंध, मक्खियों, अपशिष्ट और संभावित प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपायों पर जोर दिया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार इस मामले में विशेष रूप से यह जांच आवश्यक है कि फार्म निर्धारित मानकों के अनुरूप स्थापित है या नहीं तथा एनएच-43 और आसपास के आबादी वाले क्षेत्र से इसकी वास्तविक दूरी कितनी है।

हालांकि, किसी विशेष फार्म पर नियमों के उल्लंघन का अंतिम निष्कर्ष केवल सक्षम विभाग की स्थल जांच, दस्तावेजों के परीक्षण और लागू नियमों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

अपशिष्ट और मृत पक्षियों के निस्तारण की भी हो जांच

पोल्ट्री फार्म से निकलने वाले मैन्योर/पोल्ट्री लिटर, मृत पक्षियों तथा अन्य जैविक अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि अपशिष्ट खुले में या निर्धारित पर्यावरणीय प्रक्रिया के विपरीत रखा या निस्तारित किया जाता है तो इससे दुर्गंध, मक्खियों की समस्या और आसपास के वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

इसीलिए सरपंच ने प्रशासन से फार्म की अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था, मृत पक्षियों के निस्तारण की प्रक्रिया, जल निकासी व्यवस्था तथा दुर्गंध नियंत्रण के उपायों का मौके पर निरीक्षण कराने की मांग की है।

Water Act और Air Act के प्रावधानों की भी जांच की मांग

शिकायत में संभावित जल एवं वायु प्रदूषण के संदर्भ में जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत लागू प्रावधानों की जांच की मांग की गई है।

फार्म की क्षमता, स्थापना की तारीख और लागू नियमों के आधार पर संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से आवश्यक Consent to Establish (CTE) तथा Consent to Operate (CTO) अथवा अन्य लागू अनुमतियों की स्थिति भी जांच के दायरे में रखने की मांग की गई है। साथ ही पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत लागू दायित्वों की भी जांच किए जाने की मांग की गई है।

पहले की जांच में कमियां मिलने का सरपंच का दावा

सरपंच धर्मपाल सिंह का कहना है कि पूर्व में शिकायत के बाद जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा पोल्ट्री फार्म का निरीक्षण किया गया था। उनके अनुसार जांच के दौरान फार्म से संबंधित कुछ कमियां सामने आने की बात कही गई थी और संचालक को निर्धारित समय-सीमा में सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे।

सरपंच का कहना है कि इसके बावजूद यदि शिकायत से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता है तो प्रशासन को दोबारा स्थल निरीक्षण कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

पैसे मांगने के आरोपों को सरपंच ने बताया निराधार

धर्मपाल सिंह ने अपने ऊपर पोल्ट्री फार्म संचालक से पैसे की मांग करने संबंधी लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि शिकायत किसी व्यक्ति विशेष को परेशान करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत क्षेत्र के नागरिकों की सुविधा, पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या को प्रशासन के समक्ष रखने के उद्देश्य से की गई है।

उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते ग्रामीणों से प्राप्त शिकायतों को संबंधित विभाग और प्रशासन तक पहुंचाना उनका दायित्व है।

कार्रवाई नहीं हुई तो एसडीएम कार्यालय घेराव की चेतावनी

सरपंच ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय-सीमा में पोल्ट्री फार्म की कथित समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीणों के साथ एसडीएम कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पोल्ट्री फार्म की कुल क्षमता, स्थापना स्थल, NH-43 से वास्तविक दूरी, आवासीय क्षेत्र से दूरी, जलस्रोतों से दूरी, प्रदूषण नियंत्रण संबंधी अनुमतियां, अपशिष्ट निस्तारण व्यवस्था, दुर्गंध नियंत्रण उपाय और लागू पर्यावरणीय मानदंडों की बिंदुवार जांच कराई जाए।

सरपंच का कहना है कि यदि जांच में किसी नियम या पर्यावरणीय प्रावधान का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित संचालक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

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