मनेंद्रगढ़। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले के संयुक्त जिला कलेक्टर कार्यालय भवन के निर्माण कार्य के भूमिपूजन को लेकर जिले की सियासत गरमा गई है। भूमिपूजन कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के बयान के बाद पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने तीखा पलटवार किया है। दोनों नेताओं के बीच कलेक्टर कार्यालय के स्थान, विकास कार्यों के श्रेय, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और MCB जिले के निर्माण को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने भूमिपूजन कार्यक्रम की तैयारियों और प्रोटोकॉल पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कलेक्टर कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक भवन के निर्माण कार्य का शुभारंभ आनन-फानन में किया गया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के लिए न तो उचित प्रोटोकॉल का पालन किया गया, न आमंत्रण पत्र जारी किए गए और न ही क्षेत्र के सांसद, जनप्रतिनिधियों तथा उन लोगों को आमंत्रित किया गया, जिन्होंने MCB जिले के गठन की मांग को लेकर लंबे समय तक संघर्ष किया।
कमरो ने कहा कि MCB जिले का गठन क्षेत्र की जनता के लंबे आंदोलन, संघर्ष और जनभावनाओं का परिणाम है। ऐसे में जिले के प्रमुख प्रशासनिक भवन के भूमिपूजन जैसे ऐतिहासिक अवसर पर संघर्ष से जुड़े लोगों और जनप्रतिनिधियों को सम्मानपूर्वक शामिल किया जाना चाहिए था।
कलेक्टर कार्यालय के स्थान को लेकर भी सवाल
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कलेक्टर कार्यालय के प्रस्तावित स्थान को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने क्षेत्रवासियों की मांग और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कई बार पत्र लिखकर मांग की थी कि कलेक्टर कार्यालय ऐसी जगह बनाया जाए, जहां जनकपुर, कोटाडोल और भरतपुर जैसे दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों से आने वाले लोगों को सुविधा हो तथा कार्यालय राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप स्थित हो।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद जनभावनाओं और स्थानीय सुझावों की अनदेखी करते हुए जल्दबाजी में स्थान का निर्णय लिया गया। कमरो ने सवाल किया कि जब पर्याप्त तैयारी, जनप्रतिनिधियों से व्यापक चर्चा और जनता की भागीदारी सुनिश्चित नहीं की गई थी, तो भूमिपूजन को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों की गई?
सोशल मीडिया पोस्ट के बाद मंत्री जायसवाल का मंच से पलटवार
पूर्व विधायक गुलाब कमरो की ओर से सोशल मीडिया के माध्यम से सवाल उठाए जाने के बाद भूमिपूजन कार्यक्रम के मंच से स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। मंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने उन्हें केवल कलेक्टर और एसपी दिए थे, “बाबू भी नहीं मिले थे।”
कलेक्टर कार्यालय के स्थान को लेकर उठ रहे सवालों पर मंत्री ने कहा कि जनकपुर और कोटाडोल से आने वाले लोग पांच किलोमीटर आगे भी जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हाईवे पर जिला पंचायत कार्यालय का निर्माण किया जा रहा है और जहां जमीन उपलब्ध हुई है, वहां कलेक्टर, एसपी, खनिज तथा परिवहन विभाग सहित अन्य कार्यालयों का निर्माण किया जाएगा।
मंत्री ने विकास कार्यों पर सवाल उठाने वालों पर टिप्पणी करते हुए “पावर वाला चश्मा” लगाने की बात कही। उन्होंने भरतपुर क्षेत्र में हो रहे सड़क निर्माण सहित विभिन्न विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए करीब एक हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य चलने का दावा किया। मंत्री ने कहा कि जिसे प्रदर्शन करना है, वह प्रदर्शन करे, लेकिन विकास कार्यों में सहयोग भी किया जाना चाहिए।
“स्वास्थ्य मंत्री जी, चश्मे की जरूरत आपको है, मुझे नहीं”
मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के बयान के बाद पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने पलटवार करते हुए कहा, “स्वास्थ्य मंत्री जी, चश्मे की जरूरत आपको है, मुझे नहीं।”
कमरो ने कहा कि यदि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में MCB जिले का निर्माण नहीं हुआ होता तो आज भाजपा सरकार और मंत्री को कलेक्टर कार्यालय के भूमिपूजन का अवसर ही नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि जिले के गठन की प्रक्रिया और इसके लिए किए गए संघर्ष को नजरअंदाज कर किसी एक सरकार या व्यक्ति को पूरा श्रेय देना उचित नहीं है।
पूर्व विधायक ने भाजपा सरकार के 15 वर्षों के कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में लंबे समय तक भाजपा की सरकार रही और श्याम बिहारी जायसवाल स्वयं विधायक रहे, तब MCB जिला क्यों नहीं बनाया गया? उन्होंने सवाल किया कि उस समय कलेक्टर कार्यालय के निर्माण की दिशा में ठोस पहल क्यों नहीं की गई?
सड़क निर्माण के श्रेय को लेकर भी सियासी तकरार
गुलाब कमरो ने भरतपुर क्षेत्र में चल रहे सड़क निर्माण कार्यों के श्रेय को लेकर भी मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन सड़कों को लेकर भाजपा सरकार अपनी उपलब्धियां गिना रही है, उन्हें केवल राज्य सरकार की उपलब्धि बताना उचित नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि इन सड़क परियोजनाओं के लिए क्षेत्र की सांसद और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के सतत प्रयास भी महत्वपूर्ण रहे हैं। कमरो ने कहा कि विकास कार्य किसी एक दल या व्यक्ति की निजी उपलब्धि नहीं होते, बल्कि इनके पीछे लंबे समय तक जनप्रतिनिधियों और जनता के प्रयास रहते हैं।
उन्होंने कहा, “जनता सब देख रही है—जिला कांग्रेस सरकार ने बनाया, सड़कें सांसद के प्रयासों से आ रही हैं और अब श्रेय लेने भाजपा मैदान में उतर गई है।”
पांच किलोमीटर अतिरिक्त दूरी वाले बयान पर जताई आपत्ति
पूर्व विधायक ने मंत्री के उस बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि लोग जनकपुर और कोटाडोल से इतनी दूर आ सकते हैं तो पांच किलोमीटर और आगे क्यों नहीं जा सकते।
कमरो ने कहा कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों के आदिवासी और ग्रामीण परिवारों की वास्तविक परिस्थितियों को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों वाले ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त दूरी तय करना उतना आसान नहीं है, जितना सामान्य परिस्थितियों में दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्यालय का स्थान तय करते समय केवल उपलब्ध जमीन नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुविधा, परिवहन व्यवस्था, दूरी और भविष्य की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। कमरो ने कहा कि मंत्री पद की गरिमा के अनुरूप दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीणों की कठिनाइयों को संवेदनशीलता के साथ समझना जरूरी है।
“MCB जिले का निर्माण जनता के संघर्ष का परिणाम”
गुलाब कमरो ने कहा कि MCB जिला केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं है, बल्कि यहां की जनता के लंबे संघर्ष, आंदोलनों और जनभावनाओं का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जिले के गठन के लिए अनेक लोगों ने आंदोलन किया, कठिनाइयां झेलीं और जेल तक गए।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को जिले के प्रमुख संस्थानों के निर्माण से जुड़े ऐतिहासिक अवसरों पर सम्मान मिलना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन विकास और प्रशासनिक संस्थानों से जुड़े कार्यक्रमों में सभी जनप्रतिनिधियों तथा संघर्ष से जुड़े लोगों का सम्मान किया जाना चाहिए।
विकास का विरोध नहीं, लेकिन जनभावनाओं का सम्मान जरूरी
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य विकास कार्यों का विरोध करना नहीं है। उन्होंने कहा कि कलेक्टर कार्यालय सहित जिले में होने वाले सभी विकास कार्यों का स्वागत है, लेकिन विकास के साथ जनभावनाओं, पारदर्शिता, लोकतांत्रिक परंपराओं और क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों का सम्मान भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि MCB जिले की जनता लंबे समय से बेहतर प्रशासनिक सुविधाओं की अपेक्षा कर रही है। ऐसे में कलेक्टर कार्यालय का निर्माण केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य पूरे जिले के दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों के लिए प्रशासन को अधिक सुलभ और सुविधाजनक बनाना होना चाहिए।
भूमिपूजन कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ यह राजनीतिक विवाद अब जिले के विकास, प्रशासनिक भवन के स्थान और MCB गठन के श्रेय की बहस में बदलता नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
