📰 CGFILE — ब्रेकिंग न्यूज़ का आपका विश्वसनीय स्रोत

बैंकिंग समय में सेंट्रल बैंक की फॉल्स सीलिंग भरभराकर गिरी, बाल-बाल बचे ग्राहक; कामकाज ठप होने से दूर-दराज से आए लोग परेशान

रिपोर्टर: सुरेंद्र मिनोचा

लोकेशन: —

Aug 20, 20265 min read109 views
बैंकिंग समय में सेंट्रल बैंक की फॉल्स सीलिंग भरभराकर गिरी, बाल-बाल बचे ग्राहक; कामकाज ठप होने से दूर-दराज से आए लोग परेशान

मनेंद्रगढ़। सेंट्रल बैंक शाखा में गुरुवार को उस समय अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हो गई, जब बैंकिंग समय के दौरान ग्राहकों और कर्मचारियों की मौजूदगी के बीच छत की फॉल्स सीलिंग का एक हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा। घटना के दौरान गनीमत रही कि इसकी चपेट में कोई ग्राहक या कर्मचारी नहीं आया, अन्यथा यह घटना गंभीर हादसे का रूप ले सकती थी। घटना के बाद बैंक परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और शाखा प्रबंधन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बैंक में सामान्य रूप से कामकाज चल रहा था और ग्राहक अपने बैंकिंग कार्यों के लिए मौजूद थे। इसी दौरान छत की फॉल्स सीलिंग का हिस्सा अचानक टूटकर नीचे आ गिरा। मलबा गिरने से कुछ समय के लिए बैंक परिसर में अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद लोगों ने बैंक परिसर की स्थिति की तस्वीरें और वीडियो अपने मोबाइल कैमरों में रिकॉर्ड किए, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे।

छत के साथ खुले तार और पानी का रिसाव भी बना चिंता का कारण

वायरल तस्वीरों और वीडियो में बैंक परिसर के भीतर फॉल्स सीलिंग की खराब स्थिति, खुले विद्युत तार, छत से पानी टपकने तथा नीचे बिखरे मलबे जैसी स्थिति दिखाई दे रही है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि भवन की स्थिति पहले से खराब थी तो समय रहते इसकी मरम्मत अथवा तकनीकी जांच क्यों नहीं कराई गई?

पानी का रिसाव और खुले विद्युत तार एक साथ दिखाई देना भी सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर विषय माना जा सकता है। बैंक जैसे सार्वजनिक संस्थान में प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्राहक आते हैं। ऐसे में भवन की संरचनात्मक स्थिति, विद्युत व्यवस्था और फॉल्स सीलिंग की नियमित जांच होना बेहद जरूरी है।

हादसा टला, लेकिन जिम्मेदारी का सवाल बरकरार

घटना में किसी के घायल नहीं होने से राहत जरूर है, लेकिन इससे बैंक प्रबंधन की जवाबदेही का सवाल खत्म नहीं होता। आखिर ग्राहकों के सिर के ऊपर लगी फॉल्स सीलिंग की स्थिति पर नियमित निगरानी क्यों नहीं हुई? क्या शाखा में भवन का समय-समय पर तकनीकी निरीक्षण कराया जाता है? क्या पहले भी छत से पानी टपकने या सीलिंग खराब होने की शिकायत सामने आई थी? यदि शिकायत मिली थी तो उसका निराकरण क्यों नहीं कराया गया?

ग्राहकों का कहना है कि बैंक में आने वाला आम नागरिक अपने जरूरी काम और आर्थिक लेन-देन के लिए आता है। उसे बैंक परिसर में सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए। ऐसे में किसी भी तरह की भवन संबंधी लापरवाही को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

मोबाइल कैमरों ने उजागर की बैंक परिसर की स्थिति

घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने मोबाइल से तस्वीरें और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किए। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद बैंक परिसर की व्यवस्थाओं को लेकर लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है।

लोगों का कहना है कि यदि फॉल्स सीलिंग का हिस्सा गिरने की घटना बैंकिंग समय के बजाय किसी अन्य समय होती, तब भी भवन की स्थिति पर सवाल उठते। लेकिन ग्राहकों की मौजूदगी के बीच ऐसी घटना होना सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता को और बढ़ा देता है।

बैंकिंग कामकाज प्रभावित, दूर-दराज से आए ग्राहकों को लौटना पड़ा

फॉल्स सीलिंग गिरने और छत से पानी टपकने की स्थिति के बाद बैंक का नियमित कामकाज भी प्रभावित हुआ। सुरक्षा को देखते हुए बैंकिंग गतिविधियां बाधित रहीं, जिससे ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

सबसे अधिक परेशानी उन ग्राहकों को हुई, जो ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों से अपने जरूरी बैंकिंग कार्य कराने मनेंद्रगढ़ पहुंचे थे। कई लोगों को अपना काम पूरा किए बिना ही वापस लौटना पड़ा। ग्राहकों का कहना है कि बैंक की आंतरिक व्यवस्था में लापरवाही का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ा।

उच्च अधिकारियों से तकनीकी जांच की मांग

घटना के बाद अब बैंक के उच्च अधिकारियों से तत्काल संज्ञान लेकर शाखा का तकनीकी निरीक्षण कराने की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि केवल गिरी हुई फॉल्स सीलिंग को ठीक कर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पूरी छत, फॉल्स सीलिंग, विद्युत वायरिंग, पानी के रिसाव और भवन की अन्य कमजोरियों की विस्तृत जांच कराई जानी चाहिए।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि भवन की खराब स्थिति की जानकारी शाखा प्रबंधन को पहले से थी या नहीं। यदि पूर्व में कोई शिकायत या निरीक्षण रिपोर्ट उपलब्ध थी, तो उसके आधार पर क्या कार्रवाई की गई, इसकी भी जांच जरूरी है।

आज छत गिरी है, कल बड़ा हादसा हुआ तो जवाबदेही किसकी होगी?

इस घटना ने बैंकिंग व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि फॉल्स सीलिंग गिरने के बावजूद किसी ग्राहक या कर्मचारी को चोट नहीं आई। लेकिन इस घटना को केवल एक छोटी तकनीकी खराबी मानकर छोड़ना भविष्य में गंभीर साबित हो सकता है।

अब जरूरत है कि संबंधित बैंक के उच्च अधिकारी मामले का संज्ञान लें, शाखा की सुरक्षा व्यवस्था की जांच कराएं और आवश्यक मरम्मत तत्काल कराएं। साथ ही यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।

क्योंकि सवाल केवल एक फॉल्स सीलिंग के गिरने का नहीं, बल्कि उन ग्राहकों की सुरक्षा का है जो भरोसे के साथ बैंक परिसर में पहुंचते हैं। हादसा टल गया है, लेकिन यह घटना बैंक प्रबंधन के लिए स्पष्ट चेतावनी जरूर है।

यह लेख शेयर करें:

Twitter Facebook LinkedIn📱 WhatsApp

रिपोर्टर के बारे में

रिपोर्टर: सुरेंद्र मिनोचा

लोकेशन: —

सभी लेख देखें →