सूरज की रोशनी बनी स्वास्थ्य सेवाओं की ताकत: जनकपुर अस्पताल में 7.2 किलोवाट सौर संयंत्र से बिजली व्यवस्था को मिला संबल

डीएमएफ से 26.05 लाख रुपये की लागत से स्थापित संयंत्र से दूरस्थ वनांचल में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता को बढ़ावा, वैक्सीन और जरूरी दवाइयों के सुरक्षित संरक्षण में भी सहूलियत

रिपोर्टर: सुरेंद्र मिनोचा

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सूरज की रोशनी बनी स्वास्थ्य सेवाओं की ताकत: जनकपुर अस्पताल में 7.2 किलोवाट सौर संयंत्र से बिजली व्यवस्था को मिला संबल

एमसीबी/15 सितंबर 2026। दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर और सुचारु बनाने की दिशा में जिला प्रशासन की पहल अब धरातल पर सकारात्मक असर दिखा रही है। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र जनकपुर, विकासखंड भरतपुर में स्थापित 7.2 किलोवाट क्षमता के सौर संयंत्र ने अस्पताल की विद्युत व्यवस्था को मजबूती प्रदान की है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्वीकृत इस कार्य पर 26.05 लाख रुपये की लागत आई है।

जिला मुख्यालय से करीब 110 किलोमीटर दूर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र जनकपुर आसपास के दूरस्थ ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केन्द्र है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। मरीजों के इलाज के साथ चिकित्सा उपकरणों, डीप फ्रीजर और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के संचालन के लिए अस्पताल में नियमित बिजली आपूर्ति बेहद आवश्यक है।

बिजली की अनियमितता से आती थी स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में बाधा

सौर संयंत्र की स्थापना से पहले विद्युत आपूर्ति में अनियमितता के कारण कई बार स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में व्यवधान की स्थिति बनती थी। बिजली बाधित होने पर मरीजों के साथ अस्पताल के चिकित्सकीय एवं अन्य स्टाफ को भी परेशानी का सामना करना पड़ता था।

अस्पताल के लिए सबसे अहम चुनौती टीकों और आवश्यक दवाइयों को निर्धारित तापमान पर सुरक्षित रखना था। इसके लिए डीप फ्रीजर का लगातार संचालित रहना जरूरी है। अब सौर संयंत्र की स्थापना से अस्पताल की विद्युत व्यवस्था को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत का मजबूत सहारा मिला है। इससे चिकित्सा सेवाओं के सुचारु संचालन के साथ डीप फ्रीजर में रखे महत्वपूर्ण वैक्सीन और दवाइयों के संरक्षण में भी सुविधा हो रही है।

निर्बाध बिजली से बढ़ा मरीजों और स्टाफ का भरोसा

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सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र जनकपुर में कार्यरत स्टाफ और उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों ने सौर संयंत्र को दूरस्थ क्षेत्र के लिए उपयोगी पहल बताया है। उनका कहना है कि पहले बिजली बाधित होने की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन को लेकर चिंता बनी रहती थी। अब सौर ऊर्जा संयंत्र से विद्युत व्यवस्था को मजबूती मिलने के बाद उपचार, चिकित्सा उपकरणों के संचालन तथा दवाइयों के सुरक्षित संरक्षण में काफी सुविधा हुई है।

वनांचल में विकास की नई रोशनी

डीएमएफ मद से 26.05 लाख रुपये की लागत से स्थापित 7.2 किलोवाट क्षमता का यह सौर संयंत्र महज बिजली का वैकल्पिक स्रोत नहीं, बल्कि दूरस्थ वनांचल में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

सौर ऊर्जा से अस्पताल की विद्युत जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने के साथ वैक्सीन एवं आवश्यक दवाइयों का सुरक्षित संरक्षण, चिकित्सा सेवाओं की निरंतरता और ग्रामीण मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भी सकारात्मक असर पड़ा है।

जनकपुर के इस दूरस्थ अस्पताल में सूरज की रोशनी से पैदा हो रही ऊर्जा अब केवल बिजली का स्रोत नहीं रही, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के भरोसे की नई किरण बनकर सामने आई है।

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