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आय से अधिक संपत्ति मामले में कलेक्ट्रेट के क्लर्क ऋषि सिंह को 4 साल की सजा, 2013 की ACB छापेमारी में हुआ था करोड़ों की संपत्ति का खुलासा

रिपोर्टर: सुरेंद्र मिनोचा

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Aug 15, 20262 min read69 views
आय से अधिक संपत्ति मामले में कलेक्ट्रेट के क्लर्क ऋषि सिंह को 4 साल की सजा, 2013 की ACB छापेमारी में हुआ था करोड़ों की संपत्ति का खुलासा

अंबिकापुर। आय से अधिक संपत्ति के मामले में अंबिकापुर कलेक्ट्रेट में क्लर्क के पद पर पदस्थ रहे ऋषि सिंह को विशेष सत्र न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए 4 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चले इस मामले में अदालत ने आरोपी की उस दलील को स्वीकार नहीं किया, जिसमें जब्त की गई नगदी, जेवर और अचल संपत्तियों के वैध आय से अर्जित होने का दावा किया गया था। सुनवाई के दौरान ऋषि सिंह अपनी बेहिसाब संपत्ति के स्रोत का संतोषजनक हिसाब अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सके।

मामले की शुरुआत वर्ष 2013 में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), रायपुर की कार्रवाई से हुई थी। ACB ने 18 जून 2013 को अंबिकापुर के केदारपुर स्थित ऋषि सिंह के आवास पर छापेमारी की थी। तलाशी के दौरान उनके घर से 14 लाख 12 हजार रुपये नगद, सोने-चांदी के लाखों रुपये मूल्य के जेवरात सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और संपत्तियों से संबंधित जानकारी बरामद की गई थी।

जांच के दौरान ACB को ऋषि सिंह के नाम पर कई अचल संपत्तियां होने की जानकारी मिली। जांच एजेंसी ने उनकी ज्ञात और वैध आय तथा उनके द्वारा अर्जित संपत्तियों का तुलनात्मक परीक्षण किया। जांच में उनकी संपत्ति उनकी वैध आय की तुलना में 1049 गुना अधिक पाए जाने का उल्लेख किया गया।

ACB ने विस्तृत जांच के बाद वर्ष 2018 में विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत में अभियोग पत्र पेश किया था। इसके बाद मामले की न्यायिक सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष छापेमारी के दौरान बरामद नगदी, जेवरात, अचल संपत्तियों और आय से संबंधित दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी से उसकी संपत्तियों और आय के बीच सामने आए बड़े अंतर का स्रोत स्पष्ट करने को कहा। अभियोजन के अनुसार, ऋषि सिंह अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित किए जाने के संबंध में संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं कर सके। मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद विशेष सत्र न्यायालय ने उन्हें दोषी माना और चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।

यह मामला सरकारी सेवा में रहते हुए कथित रूप से आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों से जुड़ा रहा है। वर्ष 2013 में हुई ACB की छापेमारी से शुरू हुआ यह प्रकरण करीब एक दशक से अधिक समय तक न्यायिक प्रक्रिया में रहा। अब अदालत के फैसले के बाद मामले में महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव सामने आया है।

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