मनेन्द्रगढ़ 11 अगस्त । शहर के जे.के. डी. रोड स्थित 'आदित्य एंड ब्रदर्स वर्कशॉप' के समीप से गुजर रही 33 KV की हाई-टेंशन बिजली लाइन प्रशासन के स्पष्ट आदेशों के बावजूद अब तक नहीं हटाई जा सकी है। कोर्ट के आदेश, आवेदनों के अंबार और लाखों रुपये की धनराशि तथा निर्माण सामग्री जमा कराने के बाद भी बिजली विभाग और ठेकेदार की लापरवाही जस की तस बनी हुई है, जिससे भविष्य में एक और गंभीर हादसे की आशंका बनी हुई है।
वर्ष 2019 में हादसे में हुई थी मौत, कोर्ट ने दिया था लाइन शिफ्ट करने का आदेश
मामले का मुख्य विवरण इस प्रकार है:
दर्दनाक हादसा (2019): वर्ष 2019 में वर्कशॉप परिसर में 33 KV लाइन की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।
अदालती आदेश (2020): घटना के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मनेन्द्रगढ़ के न्यायालय में प्रकरण दर्ज कराया गया। न्यायालय के आदेशानुसार आवेदक द्वारा विभाग की समस्त प्रक्रियाएं पूरी की गईं, जिसके बाद कोर्ट ने बिजली वितरण कंपनी को इस 33 KV लाइन को तुरंत अन्यत्र सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने का आदेश दिया था।
लाखों रुपये जमा कराने के बाद भी नहीं शुरू हुआ काम
आवेदक का आरोप है कि कोर्ट का आदेश मिलने के बाद कार्य पूरा कराने के नाम पर बिजली विभाग और उनके ठेकेदार सतीश शामनानी द्वारा भारी भरकम राशि और सामग्री ली गई।
रसीद व शुल्क: विद्युत वितरण कंपनी को ₹1,09,349/- की राशि जमा की गई।
सामग्री आपूर्ति: 7 अदद विद्युत पोल, 1 गाड़ी मिट्टी, 1 गाड़ी रेता और 30 बोरी सीमेंट उपलब्ध कराए गए।
मजदूरी एवं अन्य खर्च: मजदूरी भुगतान और प्रक्रियात्मक खर्च के नाम पर ठेकेदार सतीश शामनानी को ₹2,30,000/- की नगद राशि दी गई। इसके बावजूद आज तक न तो ठेकेदार द्वारा और न ही विद्युत विभाग द्वारा मौके पर कोई कार्य किया गया है।
कलेक्टर जनदर्शन में गुहार, कार्रवाई की मांग
आवेदक अजीत सिंह (मनेन्द्रगढ़) ने बताया कि वर्ष 2025 में न्यायालय के अवमानना की शिकायत दर्ज कराने और 25/11/2025 तथा 04/08/2026 को जनदर्शन सभा में आवेदन देने के बावजूद अब तक विभाग के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
11/08/2026 को पुनः कलेक्टर जनदर्शन (टोकन क्र. 2290126000955) के माध्यम से जिला अधिकारी से गुहार लगाते हुए उन्होंने मांग की है कि:
लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत प्रकरण का शीघ्र अति शीघ्र निराकरण किया जाए।
न्यायालय के आदेश की अवमानना करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत की निष्पक्ष जांच की जाए।
लापरवाही बरतने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
