मनेन्द्रगढ़ सिविल अस्पताल की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल, 19 डॉक्टरों का ड्यूटी रोस्टर आया सामने; अब रात्रिकालीन सेवाओं की हकीकत पर नजर

220 बिस्तरीय अस्पताल में 15 विशेषज्ञ चिकित्सकों और 20 से अधिक एमबीबीएस डॉक्टरों की उपलब्धता का दावा, रोजाना 700 मरीजों की ओपीडी के बीच सुविधाओं और वास्तविक सेवाओं के आकलन की जरूरत

रिपोर्टर: सुरेंद्र मिनोचा

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मनेन्द्रगढ़ सिविल अस्पताल की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल, 19 डॉक्टरों का ड्यूटी रोस्टर आया सामने; अब रात्रिकालीन सेवाओं की हकीकत पर नजर

मनेन्द्रगढ़। शहर के 220 बिस्तरीय सिविल अस्पताल में रात्रिकालीन चिकित्सा व्यवस्था और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता को लेकर नगर पालिका उपाध्यक्ष धर्मेंद्र पटवा द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली चर्चा में है। इस बीच अक्टूबर 2026 के प्रथम पखवाड़े का आपातकालीन ड्यूटी रोस्टर सामने आने से अस्पताल में निर्धारित चिकित्सकीय व्यवस्था और मरीजों को मिलने वाली वास्तविक सेवाओं के बीच अंतर का आकलन करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, यहां 15 विशेषज्ञ चिकित्सकों और 20 से अधिक एमबीबीएस डॉक्टरों की सेवाएं उपलब्ध होने की बात कही गई है। इसके अलावा पैथोलॉजी लैब, एक्स-रे और करीब 250 प्रकार की दवाओं की उपलब्धता का भी उल्लेख है। प्रतिदिन लगभग 700 मरीजों की ओपीडी होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अस्पताल प्रबंधन के अद्यतन रिकॉर्ड से होना जरूरी है।

19 डॉक्टरों के नाम वाला इमरजेंसी रोस्टर जारी

अस्पताल के उपलब्ध आदेश के अनुसार, अक्टूबर 2026 की 1 से 15 तारीख तक आपातकालीन सेवाओं के संचालन के लिए चिकित्सकों का ड्यूटी रोस्टर निर्धारित किया गया है। इसमें दिन और रात की ड्यूटी के लिए डॉक्टरों की तिथिवार जिम्मेदारियां दर्ज हैं।

रोस्टर के मुताबिक, दिन की ड्यूटी सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक और रात्रिकालीन ड्यूटी रात 9 बजे से अगले दिन सुबह 9 बजे तक निर्धारित की गई है। इस रोस्टर में कुल 19 चिकित्सकों के नाम शामिल हैं।

इनमें डॉ. अर्चना तुलसीराम कुशवाह, डॉ. आयुष आनंद, डॉ. प्रगति जगत, डॉ. रोशनी पैकरा, डॉ. अभय कुमार भगत, डॉ. राजकुमार, डॉ. मनोहर सिंह, डॉ. स्वाति सिंह, डॉ. मधु चौहान, डॉ. स्वरज राय, डॉ. नितेश सैकराज, डॉ. दिव्या मीना, डॉ. अनीषा उपाध्याय, डॉ. शालिनी कुमारी, डॉ. शैलेन्द्र सिंह, डॉ. निशा चौधरी, डॉ. रिया एक्का, डॉ. सुभिता तिग्गा और डॉ. शिफा रहमान के नाम दर्ज हैं।

हालांकि, ड्यूटी रोस्टर में डॉक्टर का नाम होना और निर्धारित समय पर अस्पताल में उनकी वास्तविक मौजूदगी सुनिश्चित होना अलग-अलग बातें हैं। इसलिए रात्रिकालीन चिकित्सा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानने के लिए उपस्थिति रजिस्टर, इमरजेंसी में पहुंचे मरीजों के उपचार रिकॉर्ड और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों को बुलाने की व्यवस्था की समीक्षा महत्वपूर्ण होगी।

रोजाना 700 मरीजों की ओपीडी, संसाधनों पर भी हो चर्चा

मनेन्द्रगढ़ सिविल अस्पताल की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल, 19 डॉक्टरों का ड्यूटी रोस्टर आया सामने; अब रात्रिकालीन सेवाओं की हकीकत पर नजर (2)

मनेन्द्रगढ़ का सिविल अस्पताल शहर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों के लिए भी प्रमुख चिकित्सा केंद्र है। प्रतिदिन करीब 700 मरीजों की ओपीडी का आंकड़ा सही होने पर अस्पताल पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की बड़ी जिम्मेदारी स्पष्ट होती है।

इतनी बड़ी संख्या में मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारी, जांच सुविधाएं, दवाएं और प्रभावी आपातकालीन सेवाएं जरूरी हैं। ऐसे में केवल स्वीकृत पदों या उपलब्ध डॉक्टरों की संख्या के आधार पर व्यवस्था का आकलन करना पर्याप्त नहीं होगा। यह भी देखना होगा कि किस समय कितने चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं और मरीजों को जरूरत के अनुरूप उपचार मिल पा रहा है या नहीं।

लैब, एक्स-रे और दवाओं की उपलब्धता की भी हो पड़ताल

अस्पताल में अटल आरोग्य लैब, एक्स-रे और लगभग 250 प्रकार की दवाएं उपलब्ध होने की जानकारी सामने आई है। ये सुविधाएं मरीजों की जांच और उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लेकिन इनका वास्तविक लाभ तभी मिलता है, जब जरूरत के समय जांच कराई जा सके, उपकरण नियमित रूप से संचालित हों और निर्धारित दवाएं मरीजों को उपलब्ध हों।

इसलिए अस्पताल में दवाओं के स्टॉक, जांच सुविधाओं के संचालन, प्रतिदिन होने वाली जांचों और मरीजों को मिलने वाली सेवाओं का रिकॉर्ड भी व्यवस्था के मूल्यांकन का हिस्सा होना चाहिए।

जिला अस्पताल में सीटी स्कैन शुरू, मनेन्द्रगढ़ में सुविधा का इंतजार

क्षेत्र में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के क्रम में जिला अस्पताल चिरमिरी में सीटी स्कैन सुविधा शुरू हो चुकी है। वहीं, मनेन्द्रगढ़ के 220 बिस्तरीय सिविल अस्पताल में भी सीटी स्कैन सुविधा जल्द शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है।

सीटी स्कैन जैसी आधुनिक जांच सुविधा शुरू होने से गंभीर चोटों और कई जटिल बीमारियों की पहचान में मदद मिल सकती है। इससे मरीजों को जांच के लिए दूसरे शहरों में जाने की परेशानी भी कम होने की उम्मीद है। हालांकि, मनेन्द्रगढ़ में यह सुविधा कब तक शुरू होगी, इसकी निश्चित तारीख और तैयारियों की मौजूदा स्थिति अस्पताल प्रबंधन से स्पष्ट होना आवश्यक है।

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रेफरल के मामलों में कारण जानना भी जरूरी

गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पताल में रेफर किए जाने के मामलों को लेकर भी निष्पक्ष समीक्षा जरूरी है। हर रेफरल को लापरवाही मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि कई बार मरीज की गंभीर स्थिति, विशेषज्ञ उपचार की जरूरत या उपलब्ध संसाधनों की सीमाओं के कारण उच्चस्तरीय अस्पताल भेजना आवश्यक होता है।

इसके बावजूद, यदि किसी मामले में समय पर उपचार उपलब्ध नहीं कराया गया या अनावश्यक देरी हुई, तो संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर उसकी जांच की जानी चाहिए। इसी तरह, कर्मचारियों को उनके मूल कार्यस्थल से हटाकर दूसरी जिम्मेदारियां सौंपे जाने संबंधी सवालों की पड़ताल विभागीय आदेशों, स्वीकृत पदों और अस्पताल की वास्तविक जरूरतों के आधार पर होनी चाहिए।

सुविधाओं की सूची नहीं, मरीजों को मिलने वाली सेवा है असली कसौटी

मनेन्द्रगढ़ के 220 बिस्तरीय सिविल अस्पताल में चिकित्सकों की उपलब्धता, रात्रिकालीन सेवाओं, जांच सुविधाओं, दवाओं और रेफरल व्यवस्था को लेकर उठे सवालों का जवाब तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर सामने आना चाहिए।

अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों और सुविधाओं को नजरअंदाज करना उचित नहीं है, लेकिन केवल सुविधाओं की सूची के आधार पर पूरी व्यवस्था को संतोषजनक मान लेना भी सही नहीं होगा। वास्तविक स्थिति जानने के लिए उपलब्ध संसाधनों, चिकित्सकों की ड्यूटी के दौरान मौजूदगी, मरीजों को मिलने वाले उपचार और आपातकालीन सेवाओं की प्रभावशीलता का समग्र आकलन जरूरी है।

अब अस्पताल प्रबंधन से अपेक्षा है कि वह रात्रिकालीन चिकित्सकीय सेवाओं, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, रेफरल प्रक्रिया और कर्मचारियों की तैनाती को लेकर उठे सवालों पर तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करे, ताकि मरीजों और उनके परिजनों की शंकाओं का समाधान हो सके।

आखिरकार, अस्पताल की व्यवस्था की असली कसौटी रोस्टर में दर्ज नाम या सुविधाओं की संख्या नहीं, बल्कि जरूरत के समय मरीज को मिलने वाला उपचार है।

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